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नौकरशाही में लेटरल एंट्री – क्या क्यों और कैसे

नरेंद्र मोदी सरकार ने लेटरल एंट्री के माध्यम से नौकरशाही में नई प्रतिभाओं को लाकर नागरिक सेवाओं में सुधार करने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की थी, पिछले साल आठ मंत्रालयों में आठ संयुक्त सचिव स्तर की नियुक्तियों के बाद से ऐसी कोई भर्ती नहीं हुई है। 2018 में, सरकार ने कहा था कि लेटरल एंट्री से सिविल सर्विसेज में डोमेन विशेषज्ञता को लाने और केंद्र में आईएएस अधिकारियों की कमी की समस्या का समाधान करने के दोहरे उद्देश्य को पूरा किया जाएगा, लेकिन पिछले साल कहा गया कि संयुक्त भर्ती की कोई और योजना नहीं है । 

तो आइए, हम लेटरल एंट्री के a TO Z को जानते  हैं

Lateral एंट्री  क्या है?

यह संगठन में नियमित पदानुक्रम को ना मानते हुए सीधे शामिल होने की विधि को संदर्भित करता है जैसे कि एक डिप्लोमा धारक इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष में शामिल होता है , संयुक्त सचिव के रूप में वित्त मंत्रालय में शामिल होने वाले एक अर्थशास्त्री, एक सामाजिक कार्यकर्ता निदेशक के रूप में ग्रामीण विकास मंत्रालय में शामिल हो रहे हैं।

लेटरल एंट्री के क्या फायदे हैं

1. यह नौकरशाही को चुनौतियों का सामना करना में मदद करेगा, जैसे  यूपी में ‘बासवान  समिति ‘ के अनुसार, उच्च प्रशासनिक पदों पर 100 से अधिक अधिकारियों के पद खाली हैं।

2. यह सरकार में नई कार्य संस्कृति, कॉर्पोरेट नैतिकता, व्यावसायिकता लाएगा।

3. यह सरकार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगा।

4. समाज में बदलाव और साइबर खतरा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, व्यापार कूटनीति, बौद्धिक संपदा अधिकार राइज ऑफ एशिया ’जैसी अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों के कारण उत्पन्न हालिया चुनौतियां नौकरशाही से अधिक विशेषज्ञता की मांग करती हैं।

क्या भारत के लिए लेटरल एंट्री की अवधारणा नई है?

1. यह केंद्र सरकार के लिए नया नहीं है पहले लेटरल एंट्री ने अच्छे परिणाम दिए है जैसे मनमोहन सिंह, विजय केलकर, नंदन नीलकेणी  कुछ लेटरल एंट्री से आये और उच्चतम पदों पर पहुंचे

2. राज्य सरकार के स्तर पर कोई भी सफलता नहीं देखी गई है।

3.2nd ARC रिपोर्ट ने 2006 में संयुक्त सचिव स्तर पर से  लेटरल एंट्री की सिफारिश की थी 

 लेटरल एंट्री  के नुकसान क्या हैं

1. लेटरल एंट्री द्वारा मध्य स्तर पर आये नौकरशाह के लिए क्षेत्र में नीति कार्यान्वयन में चुनौतियों का पता नहीं चल सकता है, जैसे कि किसी जिले में सिंचाई के लिए परियोजना है, अक्सर समाज के हर वर्ग की मांग होती है उनके  क्षेत्र से परियोजना गुजरे ,कई बार लोकतंत्र में हर किसी को परियोजना समझाने से मुश्किल आती  है 

2. लेटरल एंट्री के माध्यम से प्रशासन में अपने परिजनों को नियुक्त कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे सकती है।

3. यह प्रतिभाशाली और मेहनती सिविल सेवकों की प्रेरणा को कम कर सकता है जो पहले से ही संगठन में काम कर रहे हैं।

4. लेटरल एंट्री से आये नौकरशाह के कार्यकाल पर सवाल बना उठेगा क्योंकि सरकार की कार्रवाई में अक्सर विशेष रूप से नीतिगत फैसले का दीर्घकालिक प्रभाव होता है जैसे कुछ साल पहले स्पेक्ट्रम और कोयला आवंटन नीतियों पर विवाद।

 5. सरकारी संगठन के लिए निजी क्षेत्र की तुलना में प्रदर्शन को मापना मुश्किल है। किसी भी मंत्रालयों में विशेष सचिव का कार्य मापना मुश्किल है।

आगे का रास्ता क्या है

1. लेटरल एंट्री के प्रवेशकों के चयन में पारदर्शिता की आवश्यकता है, यूपीएससी यहां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा

2. यह जूनियर सिविल सेवकों के लिए भी खुला होना चाहिए, चाहे वे किसी भी सेवा के लिए हों, जैसे रेलवे के सिविल सेवक परिवहन क्षेत्र में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं जैसे कि अश्वनी लोहानी ने एक इंजीनियर के रूप में काम किया था लेकिन रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने ने भारतीय रेलवे को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

3. प्रवेशको की नियुक्ति दीर्घकालिक समय के लिए होनी चाहिए जैसे कि 10 से 15 साल तक जो प्रवेशकर्ता को सरकार में हर खींच और दबाव से परिचित होने में मदद करेगी

हम अन्य देशों से क्या सीख सकते हैं जिन्होंने लेटरल एंट्री  की अनुमति दी 

आइए जानें कि यह ऑस्ट्रेलिया में कैसे हुआ 

पारदर्शी चयन, अच्छा प्रदर्शन मूल्यांकन, स्थिर कार्यकाल

इसका  प्रभाव

बेहतर ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था और शासन।

 आइए जानें कि यह NEWZEALAND में कैसे चल रहा है

 स्पष्ट उद्देश्य, स्थिर कार्यकाल, अच्छा वेतनमान

इसका  प्रभाव

न्यूज़ीलैंड की अर्थव्यवस्था ओशिनिया में सबसे तेजी से विकसित होने वाली एक बन गई

तो, अंत में हम क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं

सिद्धांत रूप में लेटरल एंट्री अच्छा  है जिसका हमें समर्थन करना चाहिए लेकिन राजनीति के साथ-साथ शासन में सुधार की और आवश्यकता है 

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